पहाड़ों के बीच एक छोटा-सा गाँव था।
गाँव के बाहर एक बहुत पुराना मंदिर था।
लोग कहते थे कि वहाँ माँगी गई हर इच्छा पूरी होती है।
लेकिन मंदिर के पुजारी की एक शर्त थी—
“सूरज डूबने के बाद मंदिर में अपनी इच्छा मत माँगना।”
गाँव के लोग इस नियम का पालन करते थे।
लेकिन निखिल इन बातों पर विश्वास नहीं करता था।
उसे लगता था कि यह सिर्फ़ लोगों को डराने का तरीका है।
निखिल की इच्छा
निखिल की छोटी बहन कई महीनों से बीमार थी।
उसका इलाज चल रहा था, लेकिन कोई सुधार नहीं हो रहा था।
एक दिन निखिल मंदिर पहुँचा।
पुजारी ने उसे देखकर कहा—
“बेटा, शाम होने वाली है। जल्दी प्रार्थना करके लौट जाओ।”
निखिल ने पूछा—
“अगर मैं रात में प्रार्थना करूँ तो क्या होगा?”
पुजारी ने उसकी आँखों में देखकर कहा—
“जवाब मिलेगा। लेकिन हर जवाब की कीमत होती है।”
निखिल ने उनकी बात अनसुनी कर दी।
रात की घंटी
रात के बारह बजे निखिल चुपके से मंदिर पहुँचा।
मंदिर का दरवाज़ा खुला था।
अंदर कोई नहीं था।
उसने हाथ जोड़कर कहा—
“भगवान, मेरी बहन को ठीक कर दीजिए। मैं कुछ भी करने को तैयार हूँ।”
उसी समय मंदिर की घंटी अपने आप बजने लगी।
टन…
टन…
टन…
अँधेरे में किसी ने कहा—
“तुम्हारी प्रार्थना स्वीकार है।”
निखिल ने पीछे मुड़कर देखा।
वहाँ कोई नहीं था।
लेकिन मूर्ति के पास एक छोटा-सा कागज़ रखा था।
उस पर लिखा था—
“कल सुबह घर लौटना।”
अमन ने नया फ्लैट खरीदा था।
फ्लैट छोटा था, लेकिन उसे पसंद था।
पहली कुछ रातें बिल्कुल सामान्य थीं।
फिर एक रात उसे दीवार के अंदर से खटखटाने की आवाज़ सुनाई दी।
ठक…
ठक…
ठक…
अमन ने सोचा कि शायद पड़ोसी कुछ काम कर रहे होंगे।
लेकिन आवाज़ उसके बेडरूम की उसी दीवार से आ रही थी, जिसके दूसरी तरफ कोई फ्लैट नहीं था।
दीवार के पीछे कौन था?
अगली रात आवाज़ फिर आई।
इस बार तीन बार खटखटाने के बाद किसी ने फुसफुसाकर कहा—
“लाइट बंद कर दो।”
अमन बिस्तर से उठ गया।
उसने कमरे की सारी लाइटें जला दीं।
फिर दीवार पर कान लगाया।
अंदर से किसी के चलने की आवाज़ आ रही थी।
जैसे कोई बहुत छोटे कमरे में इधर-उधर घूम रहा हो।
अमन ने तुरंत बिल्डिंग के मैनेजर को फोन किया।
मैनेजर ने कहा—
“उस दीवार के पीछे तो सिर्फ़ पाइप हैं।”
दीवार पर बना निशान
अगली सुबह अमन ने दीवार को ध्यान से देखा।
वहाँ एक पतली-सी दरार थी।
उस दरार के पास किसी ने नाखून से कुछ लिखा था।
“मुझे बाहर निकालो।”
अमन ने बिल्डिंग के मैनेजर को बुलाया।
दीवार की जाँच करने पर उन्हें एक पुराना बंद हिस्सा मिला।
उसके पीछे ईंटों से भरी एक संकरी जगह थी।
लेकिन वहाँ किसी इंसान के रहने की जगह नहीं थी।
फिर भी फर्श पर ताज़े पैरों के निशान थे।
आधी रात का संदेश
उस रात अमन ने दीवार के पास अपना फोन रिकॉर्डिंग पर रख दिया।
वह सोने की कोशिश करता रहा।
रात के ठीक 2:17 बजे आवाज़ आई।
पहले तीन दस्तकें।
फिर एक आदमी की फुसफुसाहट—
“अमन…”
वह बिस्तर पर बैठ गया।
आवाज़ फिर आई—
“तुमने दीवार क्यों खुलवाई?”
अमन का गला सूख गया।
उसने किसी को अपना नाम नहीं बताया था।
दीवार के पीछे से फिर आवाज़ आई—
“अब वह मुझे देख सकता है।”
रिकॉर्डिंग में क्या था?
सुबह अमन ने रिकॉर्डिंग सुनी।
शुरुआत में सब शांत था।
फिर दस्तकें सुनाई दीं।
लेकिन उसके बाद रिकॉर्डिंग में जो आवाज़ आई, वह अमन की अपनी आवाज़ थी।
“मैं तुम्हें बाहर निकाल दूँगा।”
अमन को याद नहीं था कि उसने ऐसा कुछ कहा हो।
फिर रिकॉर्डिंग में दूसरी आवाज़ आई—
“तुम पहले भी यह वादा कर चुके हो।”
अमन ने उसी समय फ्लैट छोड़ने का फैसला कर लिया।
बंद दीवार का सच
जाने से पहले वह अपना सामान लेने लौटा।
कमरे की दीवार अब बिल्कुल साफ थी।
दरार गायब थी।
खटखटाने की आवाज़ भी नहीं आ रही थी।
अमन ने राहत की साँस ली।
तभी दीवार के अंदर से एक ज़ोरदार आवाज़ आई।
धड़ाम!
उसके बाद किसी ने कहा—
“तुम मुझे फिर अकेला छोड़कर जा रहे हो?”
अमन भागकर बाहर निकल गया।
कुछ दिनों बाद उसने फ्लैट बेच दिया।
नए मालिक ने वहाँ रहने के पहले ही सप्ताह शिकायत की कि रात में दीवारों के अंदर कोई चलता है।
लेकिन असली डरावनी बात तब हुई, जब उसने अपने बेडरूम की दीवार पर एक नाम लिखा देखा।
वह नाम था—
अमन।
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लेकिन इस कहानी का सबसे डरावना सवाल यह है—
अगर वह आदमी बाहर आना चाहता था, तो अमन की आवाज़ उसके अंदर कैसे पहुँच गई?
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