रात के 12:20 बजे सौरभ रेलवे स्टेशन से बाहर निकला।
उसकी ट्रेन देर से पहुँची थी और स्टेशन लगभग खाली हो चुका था।
बाहर सिर्फ़ एक ऑटो खड़ा था।
ड्राइवर ने पूछा—
“कहाँ जाना है?”
सौरभ ने अपना पता बताया।
ड्राइवर ने बिना कुछ बोले मीटर चालू कर दिया।
ऑटो चल पड़ा।
करीब दस मिनट बाद सौरभ ने देखा कि ड्राइवर बार-बार पीछे देख रहा था।
उसने पूछा—
“क्या हुआ?”
ड्राइवर बोला—
“आपके साथ कोई और भी बैठा है क्या?”
सौरभ हँस पड़ा।
“नहीं।”
ड्राइवर ने कुछ नहीं कहा।
लेकिन उसकी आँखें डर से भरी थीं।
कुछ देर बाद ऑटो एक सुनसान सड़क पर रुक गया।
सौरभ ने पूछा—
“यहाँ क्यों रोका?”
ड्राइवर ने पीछे देखने की हिम्मत नहीं की।
उसने सिर्फ़ कहा—
“साहब… आप पीछे बैठे आदमी से कहिए कि उतर जाए।”
सौरभ ने पलटकर देखा।
पीछे की सीट खाली थी।
उसने कहा—
“यहाँ कोई नहीं है।”
ड्राइवर ने धीरे से जवाब दिया—
“मैं आपको नहीं देख रहा था। मैं उसके पैरों को देख रहा था।”
सौरभ ने नीचे देखा।
सीट के नीचे दो पैर दिखाई दे रहे थे।
लेकिन वे उल्टी दिशा में थे।
सौरभ ने तुरंत ऑटो से उतरने की कोशिश की।
दरवाज़ा नहीं खुला।
उसने ड्राइवर से कहा—
“दरवाज़ा खोलो!”
ड्राइवर ने कोई जवाब नहीं दिया।
अचानक पीछे से किसी ने उसके कंधे पर हाथ रखा।
सौरभ ने आँखें बंद कर लीं।
एक फुसफुसाती आवाज़ आई—
“मुझे स्टेशन वापस जाना है।”
सौरभ ने डरते हुए पूछा—
“कौन हो तुम?”
आवाज़ आई—
“जिसे तुमने ट्रेन से उतरते हुए देखा था।”
सौरभ को कुछ याद आया।
स्टेशन पर ट्रेन से उतरते समय उसने प्लेटफॉर्म के किनारे एक आदमी को खड़े देखा था।
वह आदमी लगातार उसे देख रहा था।
ऑटो अचानक फिर चल पड़ा।
कुछ मिनट बाद वह उसी स्टेशन के सामने आकर रुक गया।
ड्राइवर ने दरवाज़ा खोला।
सौरभ बाहर कूद गया।
पीछे देखा तो ऑटो गायब था।
सड़क पर सिर्फ़ एक पुराना ऑटो-मीटर पड़ा था।
उस पर किराया लिखा था—
₹0
और नीचे तारीख़—
17 साल पुरानी।
अगली सुबह सौरभ ने स्टेशन के पास चाय वाले से घटना बताई।
चाय वाले ने ऑटो का नंबर पूछा।
सौरभ ने नंबर बताया।
चाय वाला कुछ पल चुप रहा।
फिर बोला—
“वह ऑटो तो सत्रह साल पहले दुर्घटना में खत्म हो गया था।”
सौरभ ने पूछा—
“ड्राइवर?”
चाय वाले ने सिर झुका लिया।
“ड्राइवर और उसका एक यात्री… दोनों की मौत हुई थी।”
सौरभ ने काँपते हुए पूछा—
“यात्री कौन था?”
चाय वाला बोला—
“कोई नहीं जानता। उसके पास टिकट भी नहीं था।”
उस रात सौरभ ने अपने फोन की गैलरी देखी।
उसे याद आया कि उसने स्टेशन से निकलते समय एक फोटो खींची थी।
फोटो में वह अकेला खड़ा था।
लेकिन उसके पीछे ऑटो दिखाई दे रहा था।
ऑटो की पिछली सीट पर एक आदमी बैठा था।
सौरभ ने फोटो ज़ूम की।
आदमी का चेहरा दिखाई नहीं दे रहा था।
सिर्फ़ उसकी आँखें कैमरे की तरफ थीं।
फिर सौरभ की नजर फोटो के नीचे लिखे समय पर गई।
12:20 AM
यानी फोटो उस समय की थी जब वह ऑटो में बैठने से पहले स्टेशन पर था।
और सबसे डरावनी बात…
फोटो में ऑटो के ड्राइवर की सीट पर कोई नहीं बैठा था।
इस घटना के बाद सौरभ ने रात में कभी ऑटो से सफर नहीं किया।
वह इसे एक real horror story in hindi मानता है, हालांकि इस घटना का कोई आधिकारिक रिकॉर्ड नहीं मिला।
कई लोगों का कहना है कि स्टेशन के बाहर देर रात कभी-कभी एक खाली ऑटो दिखाई देता है।
उसका मीटर चलता रहता है।
ऐसी horror story in hindi का डर किसी भूत को देखने से ज्यादा उस एहसास में है कि शायद आप जिस सफर पर जा रहे हैं…
उसमें आप अकेले नहीं हैं।
और ऐसी unexpected stories का सबसे अजीब हिस्सा यह है कि सौरभ के फोन में वह फोटो आज भी मौजूद है।
बस एक चीज़ बदल गई है।
पहले फोटो में पीछे की सीट पर एक आदमी था।
अब वहाँ…
दो लोग बैठे दिखाई देते हैं।
पूरी कहानी पढ़ने के लिए यहाँ जाएँ:
Unexpected stories.in
#real horror story in hindi
#horror story in hindi
#short horror story in hindi
#mystery story hindi
#suspense story hindi

