राहुल एक पुराने फोटो स्टूडियो में अपनी पासपोर्ट फोटो खिंचवाने गया।
स्टूडियो काफी पुराना था।
दीवारों पर सैकड़ों तस्वीरें लगी थीं।
फोटो खींचने के बाद दुकानदार ने कहा—
“पाँच मिनट में प्रिंट मिल जाएगा।”
राहुल कुर्सी पर बैठकर इंतज़ार करने लगा।
तभी उसकी नजर दीवार पर लगी एक तस्वीर पर पड़ी।
उसमें राहुल खुद खड़ा था।
वह चौंक गया।
“ये फोटो कब ली आपने?”
दुकानदार ने तस्वीर देखी और उसका चेहरा बदल गया।
“मैंने यह फोटो नहीं ली।”
राहुल ने ध्यान से देखा।
तस्वीर के पीछे तारीख़ लिखी थी—
कल की तारीख़।
राहुल ने तस्वीर अपने साथ ले ली।
अगले दिन उसने फोटो को फिर देखा।
तस्वीर में उसके पीछे एक आदमी खड़ा था।
कल उस जगह कोई नहीं था।
लेकिन शाम को राहुल जब उसी सड़क से गुजर रहा था, एक आदमी उसके पीछे आकर खड़ा हो गया।
वही कपड़े।
वही चेहरा।
वही आदमी जो तस्वीर में था।
राहुल ने पलटकर देखा।
आदमी गायब था।
उसने तुरंत फोटो स्टूडियो जाने का फैसला किया।
लेकिन वहाँ पहुँचकर देखा…
स्टूडियो बंद था।
पड़ोस की दुकान वाले ने कहा—
“यह दुकान तो पाँच साल से बंद है।”
राहुल ने कहा—
“लेकिन मैं कल यहाँ आया था।”
दुकानदार ने उसकी तरफ अजीब नजरों से देखा।
फिर सामने लगी पुरानी फोटो दिखाई।
उस फोटो में वही स्टूडियो था।
नीचे लिखा था—
“आग लगने की घटना – पाँच वर्ष पहले।”
शहर के बाहर एक पुराना होटल था, जो कई सालों से बंद पड़ा था।
मोहित वहाँ रात में फोटो लेने गया।
होटल की तीसरी मंज़िल पर एक कमरा था—
309
दरवाज़ा आधा खुला था।
मोहित ने मोबाइल की फ्लैशलाइट जलाई और अंदर चला गया।
कमरे में धूल थी, लेकिन बेड बिल्कुल साफ़ था।
तकिए पर एक छोटा कागज़ रखा था—
“आज रात यहाँ मत सोना।”
मोहित हँस पड़ा।
“किसी ने मज़ाक किया है।”
उसने कागज़ जेब में रख लिया।
रात करीब 1 बजे उसे बाहर गलियारे में किसी के चलने की आवाज़ सुनाई दी।
ठक… ठक… ठक…
वह दरवाज़े तक गया।
गलियारा खाली था।
वापस बेड पर आया तो तकिए पर वही कागज़ फिर रखा था।
इस बार उस पर लिखा था—
“अब तुमने आवाज़ सुन ली है।”
मोहित का चेहरा गंभीर हो गया।
तभी कमरे का फोन बजा।
ट्रिन… ट्रिन…
उसने रिसीवर उठाया।
दूसरी तरफ एक आदमी की घबराई हुई आवाज़ थी—
“कमरा 309 छोड़कर तुरंत बाहर निकलो।”
मोहित ने पूछा—
“आप कौन हैं?”
आवाज़ आई—
“मैं भी इसी कमरे में हूँ।”
मोहित ने कमरे में चारों तरफ देखा।
कोई नहीं था।
फोन पर आदमी ने कहा—
“बाथरूम का दरवाज़ा मत खोलना।”
उसी समय बाथरूम के अंदर से पानी गिरने की आवाज़ आई।
मोहित पीछे हट गया।
फिर अंदर से दस्तक हुई।
ठक… ठक…
फोन पर आवाज़ फुसफुसाई—
“वह अब बाहर आने वाली है।”
मोहित ने पूछा—
“कौन?”
कुछ सेकंड चुप्पी रही।
फिर जवाब आया—
“जिसने यह कमरा तुम्हारे लिए तैयार किया है।”
बाथरूम का दरवाज़ा धीरे-धीरे खुला।
अंदर कोई नहीं था।
सिर्फ़ शीशे पर भाप जमी हुई थी।
उस भाप पर उंगली से लिखा था—
“मोहित, पीछे देखो।”
मोहित ने पीछे देखा।
बेड पर एक लड़की बैठी थी।
उसका चेहरा नीचे झुका हुआ था।
मोहित डरकर दरवाज़े की तरफ भागा।
लेकिन दरवाज़ा बंद था।
लड़की ने धीरे से सिर उठाया।
वह बिल्कुल मोहित जैसी दिखती थी।
उसने कहा—
“तुम आखिर आ ही गए।”
सुबह पुलिस को होटल के बाहर मोहित का कैमरा मिला।
होटल के अंदर कोई नहीं था।
कैमरे की आखिरी फोटो में Room 309 दिखाई दे रहा था।
कमरे में दो लोग खड़े थे।
एक मोहित था।
दूसरा भी…
मोहित ही था।
फोटो के नीचे कैमरे ने अपने आप तारीख़ लिखी थी—
“अगली रात।”
इस घटना को कुछ लोग real horror story in hindi कहते हैं, लेकिन होटल की इस घटना की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई।
कहा जाता है कि होटल बंद होने के बाद भी Room 309 की खिड़की में कभी-कभी रोशनी दिखाई देती है।
ऐसी horror story in hindi में डर किसी कमरे का नहीं होता।
डर तब लगता है जब आपको लगे कि शायद कोई आपकी जगह लेने के लिए पहले से तैयार बैठा है।
और ऐसी unexpected stories में सबसे बड़ा सवाल यही रह जाता है—
अगर Room 309 में दो मोहित थे, तो उनमें से असली कौन था?
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