रिया हर रात सोने से पहले अपनी बालकनी में कुछ मिनट खड़ी होती थी।
उसके सामने वाली बिल्डिंग की छत हमेशा खाली रहती थी।
लेकिन एक रात उसने वहाँ एक परछाई देखी।
एक आदमी की परछाई।
छत पर कोई नहीं था
रिया ने ध्यान से देखा।
परछाई चल रही थी।
लेकिन छत पर कोई दिखाई नहीं दे रहा था।
उसने मोबाइल से वीडियो बनाया।
वीडियो में भी परछाई साफ़ दिखाई दे रही थी।
हर रात वही समय
अगली रात परछाई फिर दिखाई दी।
ठीक 12:12 बजे।
तीसरी रात भी।
चौथी रात भी।
हर बार परछाई धीरे-धीरे छत के किनारे तक आती।
फिर अचानक गायब हो जाती।
पड़ोसी की चेतावनी
रिया ने पड़ोसी से पूछा।
उसने कहा—
“उस छत पर दस साल पहले एक आदमी की मौत हुई थी।”
रिया ने पूछा—
“कैसे?”
पड़ोसी ने जवाब नहीं दिया।
सिर्फ़ कहा—
“रात में छत की तरफ मत देखना।”
परछाई बालकनी तक पहुँची
एक रात रिया ने देखा कि परछाई छत पर नहीं थी।
वह उसकी अपनी बिल्डिंग की दीवार पर थी।
धीरे-धीरे नीचे आ रही थी।
रिया पीछे हट गई।
परछाई उसके कमरे की खिड़की तक पहुँची।
फिर रुक गई।
खिड़की पर दस्तक
टक…
टक…
टक…
रिया ने पर्दा नहीं हटाया।
फिर आवाज़ आई—
“मुझे देखो।”
रिया ने आँखें बंद कर लीं।
कुछ सेकंड बाद सब शांत हो गया।
अगली सुबह
सुबह रिया ने खिड़की खोली।
बाहर कोई नहीं था।
लेकिन काँच पर उँगली से एक शब्द लिखा था—
“कल।”
उस रात रिया ने कहीं और जाने का फैसला किया।
लेकिन जाने से पहले उसने आखिरी बार वीडियो देखा।
वीडियो में परछाई उसकी बिल्डिंग पर नहीं थी।
वह रिया के कमरे के अंदर खड़ी थी।
और कैमरे की तरफ देख रही थी।
आदित्य एक पुराने होटल में रुका था।
उसे कमरा नंबर 17 दिया गया।
कमरा बड़ा था।
लेकिन उसमें एक अजीब बात थी।
उसमें कोई खिड़की नहीं थी।
आदित्य ने रिसेप्शन से पूछा।
मैनेजर ने कहा—
“इस कमरे में खिड़की कभी थी ही नहीं।”
दीवार के पीछे आवाज़
रात करीब 2 बजे आदित्य को दीवार के पीछे से आवाज़ सुनाई दी।
कोई धीरे-धीरे दरवाज़ा खटखटा रहा था।
लेकिन दीवार के उस हिस्से के पीछे कोई कमरा नहीं था।
आदित्य ने दीवार पर हाथ रखा।
अंदर से किसी ने भी हाथ रखा।
वह तुरंत पीछे हट गया।
दीवार पर निशान
सुबह दीवार पर एक नया निशान दिखाई दिया।
चार उँगलियों के निशान।
जैसे किसी ने अंदर से दीवार छुई हो।
आदित्य ने होटल स्टाफ को बताया।
मैनेजर का चेहरा बदल गया।
उसने कहा—
“आज रात यह कमरा बदल लेना।”
पुराना नक्शा
आदित्य ने होटल का पुराना नक्शा देखा।
कमरा 17 के पीछे वास्तव में एक छोटा कमरा बना हुआ था।
लेकिन वह नक्शे के नए संस्करण में मौजूद नहीं था।
उस कमरे का नाम था—
“Observation Room.”
अंदर कौन था?
रात को आवाज़ फिर आई।
इस बार दीवार से फुसफुसाहट सुनाई दी—
“मुझे यहाँ बहुत समय हो गया है।”
आदित्य ने पूछा—
“कौन हो?”
जवाब आया—
“तुम्हारे आने का इंतज़ार कर रहा था।”
दीवार खुल गई
अचानक दीवार का एक हिस्सा अपने आप खुल गया।
पीछे छोटा कमरा था।
अंदर पुरानी कुर्सी…
एक टेबल…
और दीवार पर दर्जनों तस्वीरें।
हर तस्वीर में अलग-अलग लोग कमरे 17 में सो रहे थे।
आखिरी तस्वीर…
आदित्य की थी।
वह उसी रात की थी।
सुबह कमरा खाली था
अगली सुबह होटल स्टाफ ने कमरा 17 खोला।
कमरा खाली था।
आदित्य का सामान भी गायब था।
दीवार बिल्कुल सामान्य थी।
सिर्फ़ एक नई तस्वीर दीवार पर लगी थी।
उस तस्वीर में आदित्य कुर्सी पर बैठा था।
और उसके पीछे…
एक आदमी खड़ा था।
होटल के पुराने कर्मचारी इसे real horror story in hindi बताते हैं।
अगर आप horror story in hindi पढ़ते हैं, तो कमरा 17 की सबसे बड़ी पहेली शायद यही है कि तस्वीरें कौन खींचता था।
और ऐसी unexpected stories शायद हमें यह याद दिलाती हैं कि हर दीवार सिर्फ़ ईंट और सीमेंट से नहीं बनी होती।
कुछ दीवारों के पीछे…
कहानियाँ बंद होती हैं।
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