पुराने अस्पतालों में कई कमरे ऐसे होते हैं जिनका इस्तेमाल बंद हो चुका होता है।
लेकिन शहर के पुराने सरकारी अस्पताल का बेसमेंट…
कई सालों से पूरी तरह बंद था।
रोहित वहाँ रात की सिक्योरिटी ड्यूटी करता था।
एक रात CCTV पर उसे बेसमेंट का दरवाज़ा खुलता दिखाई दिया।
बंद दरवाज़ा
रोहित ने मैनेजर को फोन किया।
मैनेजर ने कहा—
“बेसमेंट में मत जाना।”
रोहित ने पूछा—
“लेकिन दरवाज़ा खुला है।”
मैनेजर ने जवाब दिया—
“उसे खुला रहने दो।”
रोहित को बात अजीब लगी।
लिफ्ट नीचे गई
करीब 3 बजे अस्पताल की लिफ्ट अपने आप चलने लगी।
डिस्प्ले पर लिखा था—
B1
रोहित ने CCTV देखा।
लिफ्ट बेसमेंट में रुकी।
दरवाज़ा खुला।
बाहर कोई नहीं था।
लेकिन अंदर से किसी मरीज की आवाज़ आई—
“नर्स…”
पुरानी फाइल
अगले दिन रोहित ने अस्पताल का पुराना रिकॉर्ड देखा।
बेसमेंट में कभी एक छोटा वार्ड हुआ करता था।
वहाँ गंभीर मरीज रखे जाते थे।
एक रात बिजली जाने के बाद कई मरीजों की मौत हुई थी।
उसके बाद वार्ड बंद कर दिया गया।
कमरे में बिस्तर
उस रात रोहित नीचे चला गया।
बेसमेंट का दरवाज़ा खुला था।
अंदर पुराने बेड पड़े थे।
एक बेड पर सफेद चादर थी।
चादर के नीचे किसी इंसान के शरीर जैसा आकार दिखाई दे रहा था।
रोहित ने चादर हटाई।
बेड खाली था।
गाँव के बाहर एक पुराना कुआँ था।
लोग उसे काला कुआँ कहते थे।
कई सालों से उसका इस्तेमाल बंद था।
मनोज को बचपन से उसके पास जाने से मना किया गया था।
लेकिन एक रात उसे उसी कुएँ से किसी के रोने की आवाज़ सुनाई दी।
आधी रात की आवाज़
रात करीब 12 बजे मनोज घर से बाहर निकला।
आवाज़ साफ़ थी।
कोई धीरे-धीरे रो रहा था।
वह आवाज़ कुएँ के पास से आ रही थी।
मनोज ने नीचे झाँका।
अंधेरा था।
फिर नीचे से आवाज़ आई—
“मुझे बाहर निकालो…”
रस्सी नीचे गई
मनोज घर से रस्सी लेकर आया।
उसने रस्सी कुएँ में डाली।
कुछ देर बाद रस्सी अचानक खिंचने लगी।
उसे लगा कोई नीचे से पकड़ रहा है।
उसने पूरी ताकत से रस्सी खींची।
लेकिन ऊपर कुछ नहीं आया।
सिर्फ़ एक पुरानी चप्पल थी।
चप्पल किसकी थी?
मनोज चप्पल लेकर गाँव गया।
एक बूढ़े आदमी ने उसे देखते ही कहा—
“ये चप्पल मीरा की थी।”
मीरा गाँव की एक लड़की थी जो लगभग बीस साल पहले गायब हो गई थी।
मनोज ने पूछा—
“क्या वह इसी कुएँ में गिरी थी?”
बूढ़े ने सिर हिलाया।
“उसका शरीर कभी नहीं मिला।”
फिर आवाज़ आई
अगली रात आवाज़ फिर आई।
लेकिन इस बार वह मनोज का नाम ले रही थी।
“मनोज…”
वह डरकर पीछे हट गया।
फिर कुएँ के अंदर से आवाज़ आई—
“तुमने मेरी चप्पल क्यों निकाली?”
मनोज घर भाग गया।
कुएँ का ढक्कन
गाँव वालों ने अगले दिन कुएँ पर भारी पत्थर रख दिया।
रात को अचानक पत्थर के नीचे से आवाज़ आने लगी।
धीमी…
लेकिन साफ़।
“मैं अभी भी नीचे हूँ।”
सुबह पत्थर हटाया गया।
कुएँ के अंदर पानी नहीं था।
नीचे सूखी जमीन थी।
और उस जमीन पर…
गीले पैरों के निशान थे।
आखिरी निशान
पैरों के निशान कुएँ से बाहर की ओर आ रहे थे।
वे सीधे मनोज के घर तक गए।
उसके कमरे के दरवाज़े पर जाकर खत्म हो गए।
दरवाज़े के अंदर से मनोज की आवाज़ सुनाई दी—
“दरवाज़ा मत खोलना।”
गाँव वालों ने दरवाज़ा खोला।
कमरा खाली था।
खिड़की खुली थी।
और फर्श पर वही पुरानी चप्पल रखी थी।
गाँव में आज भी इसे एक real horror story in hindi कहा जाता है।
ऐसी horror story in hindi का डर सिर्फ़ आवाज़ में नहीं होता।
डर तब शुरू होता है जब वह आवाज़ आपका नाम लेने लगे।
और शायद यही वजह है कि ऐसी unexpected stories सुनने के बाद आज भी गाँव के लोग उस कुएँ के पास रात में नहीं जाते।
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